पुणे जिले के पुरंदर तालुका में स्थित छोटा सा गाँव शेलकेवाड़ी, आज भारत में प्रगतिशील ग्रामीण विकास का एक प्रतीक बन गया है। एक संघर्षशील, सूखाग्रस्त गाँव से एक सौ प्रतिशत सौर ऊर्जा से चलने वाले, लैंगिक रूप से समान और दृष्टिगत रूप से विशिष्ट समुदाय के रूप में इसकी यह यात्रा सामूहिक कार्यवाही और दूरदर्शी नेतृत्व की एक शक्तिशाली कहानी है।
1. गुलाबी परिवर्तन: एकता और नारी सशक्तिकरण का प्रतीक
शेलकेवाड़ी की सबसे खास बात है इसका रंग। यहाँ का हर घर, सार्वजनिक भवन और यहाँ तक कि दीवारें भी एक समान, जीवंत गुलाबी रंग से रंगी हुई हैं।
शुरुआत: यह विचार लगभग 2014-2015 में गाँव की महिला बचत गट द्वारा शुरू किया गया था। वे अपने गाँव को एक独特 पहचान और एकरूपता की भावना देना चाहती थीं।
उद्देश्य: गुलाबी रंग केवल इसकी चमक के लिए ही नहीं चुना गया, बल्कि यह महिलाओं की ताकत, एकता और गाँव के विकास में उनकी केंद्रीय भूमिका का एक शक्तिशाली प्रतीक भी था। यह एक ऐलान था कि महिलाएं अब बदलाव की अगुवाई करने आगे आ रही हैं।
कार्यान्वयन: पूरे समुदाय, विशेष रूप से महिलाओं ने मिलकर पूरे गाँव को रंग दिया। इस सामूहिक गतिविधि ने स्वयं ही समुदाय की भावना और गर्व को मजबूत किया।
2. 100% सौर ऊर्जा की ओर यात्रा
एक आत्मनिर्भर, सौर ऊर्जा से चलने वाले गाँव के रूप में शेलकेवाड़ी का रूपांतरण इसके स्थायित्व मॉडल का केंद्र बिंदु है।
समस्या: इस क्षेत्र के कई गाँवों की तरह, शेलकेवाड़ी भी पानी की कमी और बिजली की अनियमित आपूर्ति से जूझ रहा था। खेती करना मुश्किल था और युवाओं का शहरों की ओर पलायन एक बड़ी समस्या थी।
समाधान: गाँव ने, एनजीओ और सरकारी योजनाओं की मदद से, सौर ऊर्जा का उपयोग करने की दिशा में कदम बढ़ाए।
प्रमुख सौर ऊर्जा पहल:
सौर ऊर्जा से चलने वाले पानी के पंप: गाँव ने सिंचाई के लिए सौर पैनल लगाए। इससे अनियमित बिजली ग्रिड और डीजल पर निर्भरता खत्म हुई, जिसने कृषि में क्रांति ला दी।
सौर स्ट्रीट लाइट: पूरा गाँव सौर स्ट्रीट लाइट्स से जगमगाता है, जिससे रात के समय सुरक्षा बढ़ी है, खासकर महिलाओं के लिए।
घरेलू सौर ऊर्जा इकाइयाँ: कई घर अपनी बुनियादी बिजली की जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं, जिससे उनके बिजली बिल और कार्बन फुटप्रिंट कम होते हैं।
प्रभाव: विश्वसनीय सौर-संचालित सिंचाई ने कृषि उत्पादन बढ़ाया और किसानों को अनार और फूल जैसी अधिक पानी वाली फसलें उगाने में सक्षम बनाया। इसने खेती को फिर से लाभदायक बना दिया और आर्थिक पलायन को रोका।
3. एक लैंगिक समान समुदाय का निर्माण
गुलाबी रंग शेलकेवाड़ी की महिलाओं के नेतृत्व वाली सामाजिक क्रांति का प्रमाण है।
महिला-नेतृत्व वाली शासन प्रणाली: महिला बचत गट गाँव के निर्णय लेने का केंद्र है। वे बचत समूह का प्रबंधन करती हैं, सामुदायिक निवेश पर निर्णय लेती हैं और नई पहलों को आगे बढ़ाती हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण: बेहतर कृषि और अन्य स्वयं सहायता समूह (SHG) पहलों के साथ, महिलाओं ने आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की है। वे खेती, पशुपालन और छोटे पैमाने के व्यवसायों में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
सामाजिक परिवर्तन: गाँव में सामाजिक मानदंडों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। महिलाएं सक्रिय रूप से ग्राम सभाओं में भाग लेती हैं, और उनकी राय को महत्व दिया जाता है। महिला समूह द्वारा लैंगिक भेदभाव और शराबखोरी जैसे मुद्दों को सक्रियता से संबोधित किया गया है, जिससे एक अधिक सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण हुआ है।
4. एकीकृत विकास: समग्र दृष्टिकोण
शेलकेवाड़ी की सफलता केवल एक या दो क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। यह एकीकृत विकास का एक मॉडल है:
जल संरक्षण: गाँव ने भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए कंटूर ट्रेंच, फार्म तालाब और चेक डैम बनाने जैसे व्यापक जल संरक्षण प्रोजेक्ट शुरू किए हैं।
जैविक खेती: कई किसानों ने जैविक खेती अपना ली है, जिससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम हुई है और मिट्टी की सेहत और उपज की गुणवत्ता दोनों में सुधार आया है।
स्वच्छता और स्वच्छता: गाँव स्वच्छता के उच्च मानक बनाए रखता है। खुले में शौच को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, और कचरा प्रबंधन प्रथाएं लागू हैं।
परिवर्तन के प्रमुख चालक
सामुदायिक भागीदारी: सबसे महत्वपूर्ण कारक। गाँव का हर व्यक्ति, युवा और बूढ़ा, पुरुष और महिला, परिवर्तन प्रक्रिया का हिस्सा बना।
प्रभावी नेतृत्व: स्थानीय महिला समूह ने प्रारंभिक चिंगारी जलाई और गति को बनाए रखा।
सहयोग प्रणाली: आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन जैसे एनजीओ और सरकारी योजनाओं के सहयोग से आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता मिली।
दृष्टि: समुदाय के पास एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और न्यायसंगत गाँव का स्पष्ट विजन था।
निष्कर्ष: आशा की एक किरण
शेलकेवाड़ी अब केवल एक गाँव नहीं रह गया है; यह एक प्रेरणा है। यह दर्शाता है कि सामूहिक इच्छाशक्ति, समुदाय-नेतृत्व (विशेष रूप से महिलाओं द्वारा), और सौर ऊर्जा जैसी टिकाऊ तकनीक को अपनाकर, ग्रामीण भारत अपनी खुद की सफलता की कहानी लिख सकता है। यह साबित करता है कि विकास सिर्फ बुनियादी ढांचे के बारे में नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सशक्तिकरण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के बारे में भी है, जिन सबको शेलकेवाड़ी ने खूबसूरती से एक साथ जोड़ दिया है – बदलाव के जीवंत रंग, गुलाबी में रंगकर।